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तलवार की निगरानी – talwar story in hindi

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talwar story in hindi – एक महात्मा थे उनकी तपस्या का ये प्रभाव था कि तमाम हिंसक जीव अपनी हिंसा को भूल गये थे और शेर और बकरी ,सर्प और चूहे  सब अपने जन्मजात वैर को भूल गये थे | उनके तप के प्रभाव से हुआ ये कि इंद्र का सिंहासन डोलने लगा तो इंद्र को चिंता हुई एक दिन इंद्र एक बटोही के रूप में उन महात्मा के आश्रम आया तो वंहा का माहौल देखकर उसने अपने ज्ञान से अंदाज़ा लगाया कि अब उसका सिंहासन अधिक दिन तक कायम नहीं रहेगा अगर महात्मा ऐसे ही तपस्या करने में लगे रहे तो इस पर उसने एक चाल चली आश्रम के अंदर जाकर इंद्र ने महात्मा से कहा कि ” गुरुदेव मैं कुछ दिन अपने शहर जा रहा हूँ इसलिए अपनी तलवार आपके पास छोडके जा रहा हूँ आप कुछ दिन इसका ध्यान रखेंगे तो बड़ी कृपा होगी |”

महात्मा ने बड़े ही सहज भाव से ये स्वीकार कर लिया और सोचा चलो थोड़े दिन की तो बात है | उन्होंने काफी दिनों इंतजार किया फिर भी कोई नहीं आया तो उसके बाद महात्मा का ध्यान उसकी तलवार पर अधिक रहता जन्हा भी जाते तलवार को साथ ले जाते और इसी तरह उनकी तपस्या का क्रम टूट गया | सभी हिसंक जीवो की हिंसक प्रवृति फिर से लौट आई | इंद्र ने देखा अब उसकी सिंहासन डोलना भी बंद हो गया और लगा कि उसकी चाल कामयाब हो गयी है |

moral : इसी तरह महत्वाकांक्षा की तलवार भी होती है जो मनुष्य को अपने महत्व की चीज़े प्राप्त करने के लिए हर तरह के उचित अनुचित काम करने के लिए प्रेरित करती है इसलिए हम जीवन में इस से बच कर रहना चाहिए |