Home विचार प्रवाह समलैंगिकता : नैतिक और अनैतिक – samlengikta netik ya anetik in hindi

समलैंगिकता : नैतिक और अनैतिक – samlengikta netik ya anetik in hindi

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  samlengikta netik ya anetik in hindi- वैसे हो सकता है समलैंगिकता के  मुद्दे पर हर किसी की अलग राय हो लेकिन फिर भी ये गलत है और न ही ये जरुरी है  कि हम इसे  नैतिकता  या अनैतिकता की कसौटी पर ही कस के देखे क्योकि ऐसा है कि नैतिकता हमेशा ही सार्थक होने या सत्य होने के लिए बाध्य नहीं है । आप खाप पंचायतो या अन्य कोई ऐसा ही उदाहरण ले लीजिये जिसका मूल आप किसी तरह की रूढ़िवादी और विज्ञानं से परे जो परम्पराए है उनको मानते हो ,तो आप ही बताये वो किस आधार पर क्रूरतम और अमानवीय यातनाओ के लिए किसी को सामाजिक तौर से सहने व मानने के लिए लाचार करती है ??? क्या वो ऐसा नैतिकता से ही शुरू नहीं करते अगर हाँ  तो जब आप प्रेम संबंधो और ऑनर किलिंग के लिए इतने सवेंदनशील हो सकते है तो फिर आप शारीरिक संबंधो को ही कैसे नैतिकता  पर खत्म कर सकते हो ।

   आपको याद हो अगर किसी ने अच्छा साहित्य पढ़ा हो तो कि प्रेम देह का मार्ग है जो आपको उस तक लेके जाता है लेकिन इसका उल्टा नहीं है क्योकि देह से प्रेम के लिए कोई राह नहीं निकलती तो अगर कोई आपसी सहमति से आपस में साथ रहना पसंद करते है तो उसमे हर्ज़ क्या है । अब मेने सोशल नेटवर्क्स पर और कई जगहो पर लोगो की इस बात के लिए फ़िक्र उनकी अश्लील भाषा में देखी  वही लोग जो कहते है हमारे बच्चो पर ऐसे कल्चर का बुरा असर पड़ेगा लेकिन मैं कहता हूँ ऐसा केसे हो सकता है आप जो बात टिप्प्णीओं के माध्यम से सोशल वेबसाइट पर ऐसी भाषा में कर रहे हो इसकी तुलना में तो कम ही पड़ेगा क्योकि मुझे नहीं लगता बहुत वो होंगे जो ऐसे रिश्तो में होके सार्वजानिक तौर पर उन्हें जाहिर भी कर पाते हो या फिर हिम्मत भी रखते हो ,अगर मेट्रो सिटीज की बात न करे तो… और अब कुछ लोग कहेंगे कि नहीं हो सकता है कि न फर्क पड़े क्योकि संस्कार वो हो सकते है जो इन्हे बचाके रखे लेकिन मैं फिर कहूंगा कि ऐसा जरुरी तो नहीं कि आप अपने संस्कार अपनी आगे वाली पीढ़ी पर थोपके रख सकते है क्योकि जंहा के 41 प्रतिशत लोग ये स्वीकार करते है कि उनका शादी के बाद भी किसी अन्य से अफेयर रहा है और उन्होंने उनके साथ बिस्तर भी साझा किया हो तो  ये तो मुझे लगता है बचकानी बात होगी अगर आप संस्कारो के अनुगमन की बात करे तो ।

   अब लोग एक और रीज़न भी देते है भई प्रकृति भी जो है वो भी इन संबंधो को स्वीकार नहीं करती है क्योकि इनकी कोई परिणिति भी नहीं तो मैं तो कहता हूँ अच्छा है अब जरुरत ही क्या है आज भी  ऐसे लोगो की  कमी थोड़े है  जो बच्चे पैदा करने की मशीन से तुलना करने में  बने हुए है तो फिर अच्छा ही है न कुछ लोग ऐसे भी है जो बिना किसी कानूनी बाध्यता के परिवार नियोजन में लगे है मेरे ख्याल से देश के लिए तो अच्छा ही है और लोगो के लिए भी कोई परेशानी वाली बात नहीं होनी चाहिए जैसा मैं ऊपर बता चुका हूँ ये आपके संस्कारो के लिए कोई मुसीबत नहीं है और अगर हो तो भी आप तो रोक नहीं सकते क्योकि जो भी है जितना भी है जैसा भी है उन सब में अप्रत्यक्ष रूप से आपका कॉन्ट्रिब्यूशन है तो मेरे ख्याल से आप  मानो और जानो कि ये  न सिर्फ एक आत्मसंतुष्टि का जरिया है बल्कि साथ ही  एक मानवीय बुद्दि और ठस दिमाग की सीमाओ से परे का आपसी प्यार जिसमे बस मतभेद नहीं है तो केवल लिंग निर्धारण प्रणाली का । और वैसे भी हमे ये नहीं भूलना चाहिए कि हर किसी के लिए ख़ुशी के लिए केवल एक ही तरह के मायने नहीं हो सकते और उन्हें हक़ है कि वो उनके अपने मतलब से हो सकते है या वो उन्हें खुद परिभाषित कर सकते है |

    अब वेसे लिखने को बहुत है लेकिन मेरा मन नहीं है सो मैं चाहूंगा कि मेने नैतिकता से जुड़े कुछ सवाल उठाये कि क्यों ये नैतिक नहीं है जबकि ऐसा है तो चाहूंगा कि आप अपने विचार जो कि आप मानते हो कि ये अनैतिक है तो क्यों और नहीं है तो क्यों ?? वो आप नीचे दिए गये कमेंट बॉक्स में टिप्प्णी के माध्यम से दे सकते हो लेकिन ध्यान रहे भाषा जो है वो वार्तालाप या अभिव्यक्ति के मानको से बाहर की नहीं हो