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स्वर्ग जाने के लिए खुद को ही मरना पडता है- samuhik paryas short story

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samuhik paryas short story एक बार किसी गाँव के जागीरदार ने एलान करवाया कि कल एक बडी दावत हॆ, उसमें खीर बनाने के लिये प्रत्येक घर से एक एक लीटर दूध गाँव के बीच रखे बडी कडाही मे लाकर डालना हॆ । दूसरे दिन मुंह अंधेरे ही लोगों ने कडाही मे दूध डालना शुरू कर दिया लेकिन जब सुबह देखा तो कडाही पानी से भरी थी । मतलब हर गाँववाला यह सोचकर पानी डाल गया कि बाकी सब तो दूध डाल ही रहे हॆ तो मेरे पानी का क्या पता चलेगा ।  

    साथियों प्रत्येक व्यक्ति का ईमानदारीपूर्वक किया गया प्रयास ही किसी सामूहिक कार्य को सफल बना सकता हॆ । यह सोचना कि बाकी लोगों के प्रयासों से ही मेरा भी काम हो जायेगा —– असफलता की शुरुआत यहीं से होती हॆ ।

स्वर्ग जाने के लिए खुद को ही मरना पडता है ।