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उपवन के पौधे -Garden story in hindi

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Garden story in hindi – उपवन में एक नये पौधे को पाकर उपवन का एक पुराना पोधा उदास हो गया और गहरी श्वास लेकर कहने लगा कि ‘अब हमे कोई नहीं पूछेगा और न ही हमारी पहले की तरह देखभाल होगी ‘ अब हमारे दिन लद गये है अब पहले जैसा कुछ भी नहीं रहेगा इस पर पास के एक प्रोढ़ और अनुभवी पौधे ने उस पौधे से कहा तुम्हारा इस तरह प्रलाप करना ठीक नहीं है और नहीं ही इस नए पौधे इर्ष्या करना ठीक है |

युवा पौधा कहने लगा ‘तात पहले उपवन का माली हमारा कितना ध्यान रखता था अपना सारा समय भी हमे देता था लेकिन अब वह ऐसा नहीं करेगा अब वह अपना सारा समय इस नन्हे पौधे को देगा क्योंकि वह इसकी कोमल पत्तियों की और मोहित हो गया है |’ हमारी तरफ तो आंख उठाकर भी नहीं देखता है जबकि सारा दिन उसी छोटे पौधे में ही मग्न रहता है |

तो उस बूढ़े अनुभवी वृक्ष ने कहा नहीं ये सही नहीं है हमारा माली एक अनुभवी इन्सान है वह जानता है कि किसे देखभाल की अधिक जरुँत है और किसे कम लेकिन फिर भी वह हम सब से समान स्नेह करता है और तुम ऐसे प्रलाप करके माली के असीम प्यार और अवदान का अपमान कर रहे हो जबकि वह सभी को एक ही नजर से देखता है |

जरा पीछे के दिनों को याद करो यही माली हमारा कितना ध्यान रखता था और हमारी कितनी देखभाल करता था और इसी की मेहनत और लगन का परिणाम है कि आज हमारी जड़े इतनी गहरी है कि हम धरती में से पानी और भोजन खोज पाते है |अगर इसका सरंक्षण या प्यार नहीं मिलता तो हम किसी जानवर का निवाला हो चुके होते या फिर किसी बच्चे की शेतानियों का शिकार हो जाते लेकिन ऐसा नहीं होता इसी से तुम समझ सकते हो कि माली हमसे कितना प्यार करता है |

इस पर युवा पौधा भावुक हो गया और कहने लगा तात आपने मेरी आंखे खोल दी है और मेरा ह्रदय व्यर्थ में ही संताप से भरा जा रहा था लेकिन आपने मुझे यथार्थ की दृष्टि प्रदान की है | ईर्ष्या की अग्नि में मैं अपने निर्माता और पालक का अपमान कर बैठा था मुझे क्षमा करो |