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सोलर पैनल क्या है और यह कैसे काम करता है जानिए

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Solar Panel के बारे में हमने बचपन में किताबों में पढ़ा है लेकिन आज के समय में जब हमारी बढती हुई रोज की जरूरतों जैसे कि बिजली और उर्जा की जरूरतों को पूरा करने के लिए हमारे पारम्परिक ईंधन जो है वो एक तो सीमित है और दूसरा उनके उपयोग से बहुत प्रदुषण होता है जिसकी वजह से हमारी पूरी धरती के पर्यावरण पर इसका प्रतिकूल असर पड़ा है और ये आप मौसम के परिवर्तन के अलावा हवा की शुद्धता में भी महसूस कर सकते है ऐसे में उर्जा के दूसरे तरीकों को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है जो हमे उर्जा तो दें लेकिन प्रदुषण नहीं करें जिनकी वजह से इन्हें हम alternative energy sources की श्रेणी में शामिल करते है तो ऐसा ही एक जरिया है जो सूर्य की रौशनी को Electricity में बदलने के लिए हम इस्तेमाल करते है और इन्हें हम solar panel की नाम से जानते है और इसी बारे में आज हम थोड़ी डिटेल्स में बात करते है –

Solar Panel in hindi

Solar Panel को वैसे तो आप सब जानते है इसलिए इस बारे में अधिक बात करने की जरुरत मुझे नहीं लगता है इसलिए हम अब सीधे इसके तकनीकी पहलुओं पर गौर करते है | एक बड़ा Solar Panel बनाने के लिए कई छोटे छोटे Solar cells का उपयोग किया जाता है और इन्हें वैज्ञानिक भाषा में हम solar module के नाम से भी जानते है और इन्हें ही photo voltaic cell भी कहा जाता है और इनकी खासियत यह होती है कि जैसे ही इन पर प्रकाश पड़ता है वैसे ही यह कुछ वोल्टेज उत्पन करते है लेकिन यह मात्रा बहुत कम होती है इसलिए इन्ही छोटे छोटे cells को मिलाकर एक बड़ा solar panel बनाया जाता है ताकि एक पर्याप्त मात्रा में इतना वोल्टेज प्राप्त किया जा सके कि वह हमारे काम के उपकरणों को चलाने लायक हो जाये |solar panel in hindi

हर एक photo voltaic cell जो होता है वो एक तरह का सैंडविच की तरह दो अलग अलग semi-conducting materials का बना होता है जिसमे सिलिकॉन का इस्तेमाल होता है | यह उसी तरह के semi-conducting material होते है जो हमारे टीवी रेडियो या बाकि दूसरे तरह के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में काम में लिए जाते रहे है | सिलिकॉन की कुछ खास तरह की प्रॉपर्टीज होती है जिसके बारे में हमने 10th ग्रेड में पढ़ा होता है कि यह एक अर्धचालक होता है जिसके इसी गुण की वजह से यह खास हो जाता है | photo-voltaic cell  को बनाने के लिए दोनों परतों को एक विशेष प्रक्रिया से डोप किया जाता है इसमें पी टाइप की परत के उपर एन टाइप की परत को इस तरह व्यवस्थित किया जाता है कि उपरी परत में कुछ मुक्त इलेक्ट्रान अधिक संख्या में होते है | ऐसे में जब भी प्रकाश इस पर पड़ता है वो अपनी उर्जा इसमें छोड़ देते है जिसकी वजह से इलेक्ट्रॉन्स का प्रवाह शुरू हो जाता है जिसकी वजह से बिजली का उत्पादन होता है |

हालाँकि इस बारे में लोगो को जानकारी की कमी है इसलिए alternative energy sources के तौर पर पहले solar panel को लोगो ने अपनाया नहीं था लेकिन बाद में सरकार के द्वारा कई ऐसी योजनायें चलायी गयी और solar panel लगाने पर सब्सिडी का प्रावधान कर दिया गया जिसके चलते लोगो में इसे लेकर रुझान हुआ और अब बहुत से लोग अपने घरों की छतों पर इसे लगवा रहे है | भारतीय बाजार में मुख्यत दो तरह के सोलर पैनल मोजूद है जिन्हें आप खरीद सकते है वो है –

  • Monocrystalline Solar Panels
  • Poly-crystalline Solar Panels

Mono-crystalline Solar Panels – इस तरह के सोलर पैनल थोड़े महंगे होते है और इसी वजह से इनकी क्वालिटी में भी होता अंतर होता है क्योंकि इसे बनाने में single silicon crystal का इस्तेमाल होता है जिसकी वजह से यह Poly वाले solar panel से अधिक efficent होते है और per square feet के हिसाब से अधिक इलेक्ट्रिसिटी बनाते है |

Poly-crystalline Solar Panels – नाम से ही पता चलता है poly type के सोलर पैनल multiple crystals के बनते होते है और Mono-crystalline Solar Panels की तुलना में यह कम महंगे होते है | भारत में अधिकतर इसी तरह के solar panel लोकप्रिय है |

तो ये है Solar Panel in hindi और अधिक जानकारी के लिए आप हमे ईमेल कर सकते है और हमसे regular updates hindi में पाने के लिए आप लाल रंग के घंटे के निशान पर क्लिक कर सकते है या ईमेल सब्सक्रिप्शन भी ले सकते है |

Image Credit – amazon