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बच्चो की कुछ खास तरह की समस्याएं ऐसे सुलझाएं

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Child care कोई बच्चो का खेल नहीं है और अच्छे अच्छे parents के भी इसमें पसीने आ जाते है क्योंकि बड़े होते बच्चो को एक आइडियल तरीके से deal करना कि उनके विकास में कोई बाधा नहीं हो एक कला है और कुछ जानकारियां भी बच्चो के व्यवहार की आपको होना चाहिए तो चलिए कुछ ऐसे परेशानियों के बारे में जानते है जो आपको child care के दौरान कभी भी आ सकती है –

Child care tips in hindi

असल में होता है यह है जब तक बच्चा सामान्य व्यवहार करता है जैसे कि उसकी उम्र के बाकि बच्चो में आपने देखा होगा आपको चिंता नहीं होता है और गाड़ी जैसे चलती है चलती जाती है लेकिन अगर बच्चे का व्यवहार सामान्य नहीं है तो यह आपको उलझन में डाल सकता है क्योंकि अधिकतर parents के समझने में इस बात की चूक हो जाती है अगर उनका बच्चा किसी भी वजह से मनोवैज्ञानिक तौर पर मजबूत नहीं है | उसके बाद अगर school से बच्चे की शिकायत आपको मिलती है कि आपका बच्चा आलसी है या पढने में ध्यान कम देता है तो यह pressure भी अलग से आपके बच्चे को सहन करना पड़ता है जाने अनजाने में ही | जबकि आपको चाहिए कि आप समझदारी दिखाते हुए बच्चो के व्यवहार को गौर से समझे और देखें कि आपके बच्चे की समस्या कन्हा है उसके बाद भी अगर आपके समझ के बाहर चीज़े जाती है तो आप किसी अच्छे मनोवैज्ञानिक या बच्चो के doctor से राय ले सकते है |

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बच्चो को होने वाली समस्याएं / Child’s problems-

डिस्लेक्सिया – इस बीमारी से पीड़ित बच्चे सामान्य बच्चो से किसी भी मामले में कम नहीं होते बल्कि इन्हें किसी शब्द विशेष को पहचानने और क्रम याद रखने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है |

डिस्केलकुलिया –  ऐसे बच्चे भी बाकि बच्चो की तरह ही होते है बस इनमे math को लेकर और अंको को पहचान पाने में थोड़ी समस्या होती है |

देखने की समस्या – कभी कभी बच्चो को ब्लैकबोर्ड पर देखने में भी समस्या का सामना करना पड़ता है और वो अपने teacher से किसी भी वजह से कुछ कह नहीं पाते है |

दिस्प्रेक्सिया – इस बीमारी में बच्चो में बोलने की भी समस्या होती है और साथ ही बैठने में भी समस्या आती है और साथ ही बच्चे कभी कभी बिना मतलब की बातें भी करने लगते है |

child care में आने वाली इस problems का reason क्या है ?

  • सबसे बड़ा reason है माता पिता में काम का तनाव क्योंकि इसी वजह से वो बच्चो इतना समय नहीं दे पाते है जितना पहले के माता पिता अपने बच्चो को दिया करते थे |
  • एकल परिवार की परिभाषा की वजह से परिवार छोटे हो गये है ऐसे में जब पति और पत्नी working हो तो हालत और भी बुरे हो जाते है क्योंकि अब दादा दादी या कोई बड़ा नहीं होता है जो माता पिता की अनुपस्थिति में आपको सहजता से रख सकें और शायद इसी से बच्चो में शुरू से ही अकलेपन महसूस होता है जिसकी जगह वो इन्टरनेट या टीवी से पूरा करते है |
  • गलाकाट प्रतिस्पर्धा के चलते बच्चो में शुरू से ही प्रतिस्पर्धा होती है जिसकी वजह से हर माता पिता अपने बच्चे से best चाहते है और ऐसे में best चाहने और बच्चो के प्रति जरूरत से अधिक महत्वाकांक्षी होना अपने बच्चे में कई तरह के भावनात्मक level विकसित होना रोक देता है |
  • बच्चो को समय से पहले ही school में admit करवा देना भी pareting के लिहाज से सही नहीं है क्योंकि ऐसे में बच्चे अपना बचपन कन्हा जी पाते है और अभिभावकों को इस बारे में सोचना चाहिए |
  • साथ ही बच्चो को न केवल पढने के लिए अपितु खेल जैसी शारीरिक गतिविधि के लिए भी प्रेरित करना चाहिये ताकि उनका सर्वांगीण विकास हो सके |

समाधान क्या है ऐसी समस्याओं के –

  • डिस्लेक्सिया ,डिस्केलकुलिया और ऐसी ही कुछ मानसिक समस्याओं का सफल इलाज किसी भी मनोचिकित्सक की देख रेख में हो सकता है जबकि ऐसे में बच्चो के parents के साथ साथ उनके  टीचर्स भी इतने काबिल हो कि ये चीज़े समझ पाए और इसके लिए parents को चाहिये वो उनके टीचर्स के साथ दोस्ताना व्यवहार रखें और उन्हें बच्चे की समस्याओं पर बात करने के लिए उनसे मिलें |
  • अगर आपको लगता है आपके बच्चे की सीखने की गति कम है तो आप किसी अच्छे tutor को hire कर सकते है जिन्हें special हालात में बच्चो के साथ deal करने और उन्हें पढाने के अनुभव हो |

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Image Credit – Free Images