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Story of mewar in hindi – मेवाड़ के राजा राणा लाखा की कहानी

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Story of mewar in hindi –  mewar की ये कहानी दिखाती है कि पहले के जमाने में लोग किस हद तक विश्वसनीय और वचन का पालन करने वाले होते थे जबकि इसी वजह से ऐतिहासिक कहानिया सच सी नजर नहीं आती क्योंकि आज के जमाने में जन्हा हर पल झूट का सहारा लिया जाता है लेकिन यह mewar की कहानी बिलकुल सत्य है और इतिहास में खास स्थान रखती है |

एक समय में मेवाड़ के राजा से राणा लाखा जिसके बेटे का नाम था चुन्डाजी | चुन्डाजी बहुत साहसी व वीर था और इसी वजह से वो राजगद्दी का भी अधिकारी था | एक दिन पड़ोस के राजा रणमल ने अपनी बेटी के विवाह के लिए अपने भाई रतनदेव के हाथ एक नारियल लाखा के दरबार में भेजा ताकि चुड़ाजी के साथ राजकुमारी के रिश्ते की बात हो सके |

Story of mewar in hindi
Story of mewar in hindi

 

उस समय जब रतनदेव नारियल लेकर वंहा पहुंचे तो चुन्डाजी दरबार में नहीं था जबकि राणा लाखा को मजाक करने की सूझी और उन्होंने कहा – मुझ बूढ़े के लिए अब कौन नारियल भेजेगा ? यह सुनकर दरबारी खिलखिला उठे और इतने में चुन्डाजी भी आ गया और उसने यह बात सुन ली तो पिता ने आते ही उसे अपने पास बिठाया और बोले कि बेटा तुम्हारे लिए नारियल आया है तुम कहो मैं तुम्हारे विवाह की तयारी करूँ ?

चुन्डाजी ने विनय भाव से कहा – नहीं पिताजी नारियल आपके लिए है इसलिए रणमल की बेटी का विवाह भी आपसे ही होगा इस पर लाखा ने अपने बेटे को समझाया कि वो तो केवल मजाक कर रहे थे और नारियल तुम्हारे लिए ही आया है लेकिन चुड़ाजी ने अपने पिता की एक नहीं सुनी और कहा पिताजी आपको ये विवाह तो करना ही पड़ेगा क्योंकि हमारे द्वार पर आये अथिति खाली नहीं जाते यह आप जानते है |

विवाद बढ़ गया तो राजपुरोहित ने दोनों को शांत किया तो लाखा को यह अपमान सा लगा और उन्होंने साफ साफ चुन्डाजी से कहा बेटा मेरे राजकुमारी से विवाह करने के मतलब जानते हो कि जो राजकुमारी से सन्तान पैदा होगी फिर वो उतराधिकारी बनेगी और तुम्हे अपनी राजगद्दी से हाथ धोना पड़ेगा | इस पर चुन्डाजी बोला पिताजी मुझे मंजूर है | मैं इस कुल का सेवक हूँ सो मुझे राजपाट मोह नहीं बस आप विवाह करलें राजकुमारी के साथ |

यह सुनना था कि राणा लाखा को अपनी गलती का अहसास हो गया और वह सिर पकडके बैठ गये अनेक लोगो ने चुन्डाजी को समझाया पर चुन्डाजी ने नहीं माना आखिर में राणा लाखा का विवाह उस राजकुमारी के साथ हो गया और अब कुछ ही समय बात एक पुत्र भी हुआ जिसका नाम रखा गया मुकुलजी अभी यह चार पांच महीने का ही था की लाखा के सामने एक नयी मुसीबत आ गयी | क्योंकि एक दिन कुछ पंडित लाखा के सामने पहुंचे और उनसे कहा कि कुछ मुग़ल शासक हमे परेशान करते है और हमारे मंदिरों का अपमान करते है इसलिए हमारी रक्षा करिए और कोई भी हमारी रक्षा के लिए तैयार नहीं हुआ इसलिए बड़ी उम्मीद से हम लोग आपके पास आये है |

राणा लाखा ने सबको वादा कर अथितिशाला में भेज दिया और खुद युद्ध के लिए तैयार होने लगा और चुन्डाजी को बुलाकर कहा मैं अपने राजधर्म को निभाने जा रहा हूँ हो सकता है मैं वापिस नहीं लौट पाऊ इसलिए तुम मेरे बाद राज्य को सभाल लेना इस पर चुन्डाजी ने आँखों में आंसू लिए कहा आप मुकुलजी का राजतिलक करके जाईये | यह सुन राणा की आंखे भर आई क्योंकि चुन्डाजी ने अभी भी गद्दी पर बैठने से मना कर दिया तो मुकुलजी का राजतिलक किया गया और रानी गुणवती उस समय मुकुल को अपनी गोद में लेकर बैठी थी और राजा ने मुकुलजी का राजतिलक कर दिया और कहा कि जबतक मुकुलजी नाबालिग है चुन्डाजी राज्य संभालेगे और आप सभी लोग उसका सहयोग करे |

राणा लाखा में मैदान में मुग़ल सेना के छके छुड़ा दिए लेकिन किसी भील का निशान चूक जाने के तीर उनकी गर्दन में लगा जिस से वो वीरगति को प्राप्त हुए और उनकी वीरता के किस्से मैदान में गूंज रहे थे |

महाराणा लाखासिंह का शासनकाल ( 1382 – 11421 ई० ) – योग्य शासक तथा राज्य के विस्तार करने में अहम योगदान। इनके पक्ष में बड़े पुत्र चुडा ने विवाह न करने की भीष्म प्रतिज्ञा की और पिता से हुई संतान मुकुलजी को राज्य का उत्तराधिकारी मानकर जीवन भर उसकी रक्षा की।

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