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subhash chandra bose in hindi – नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का एक संस्मरण

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subhash chandra bose in hindi एक बार की बात है कुछ भारतीय और कुछ अंग्रेज खिलाडी खेल रहे थे अंग्रेजी विद्यार्थियों को बड़ा घमंड था वे भारतीय छात्रों को नीचे नजर से देखा करते थे एक बालक को यह बात बहुत बुरी लगी | वह जरुर अंग्रेजी के स्कूल में अंग्रेज बच्चो के साथ पढता था लेकिन अपने देश और समाज और संस्कृति के लिए कभी भी अपमानजनक शब्द वह सुनने को तैयार नहीं होता था और कोई भी अगर इस बारे में उस से कुछ कहता तो वो बालक मुहं तोड़ जवाब देता | इसी आदत के चलते सब और उसका दबदबा था |

subhash chandra bose in hindi
subhash chandra bose in hindi

 

उस दिन लडको में कुछ बात हो गयी और काफी गहरा विवाद हो गया लडको के बीच बहुत कहासुनी हो गयी और अंग्रेज लडको ने भारतीय लडको का काफी अपमान किया | तभी एक लड़का वंहा पहुँच गया और उसने अंग्रेज लडको से पूछा ‘क्या बात है ‘ मैं हिन्दुस्तानी लडको से बात नहीं करता मैं उन्हें ठोकर मारकर गिरा देता हूँ | एक अंग्रेज लड़के ने कहा | उस बालक ने कहा ” तुमने गलत सोचा है ” हिन्दुस्तानी लड़के भी अंग्रेज लडको को ऐसी ही ठोकर मारकर गिरा देते है यह कहते हुए उस बालक ने अंग्रेज लड़के को ठोकर मारकर गिरा दिया । 

अब तो उस बालक का रौब और भी अधिक हो गया । वह बालक था – सुभाषचंद्र बोस जो बाद में नेताजी के नाम से जाना गया । जनता की सेवा और कल्याण के विचार नेताजी में बचपन से थे । एक बार हैजा फ़ैल गया । इस घातक बीमारी ने अनेक लोगो को अपने चपेट में ले लिया । लोग मरने लगे तो बालक सुभाष ने ये खबर पढ़ी और पहुँच गये अपने चुने हुए साथियों को लेकर गन्दी बस्ती में रह रहे लोगो की सेवा करने । सबने मिलकर गन्दी बस्ती और मकानों की सफाई की और लोगो को साफ खाना और पानी के लिए हिदायत दी । बीमार लोगो को दवाईया दी । इनका ये सेवाकार्य कुछ लोगो को तो अच्छा लगा लेकिन कुछ को बहुत नागवार गुजरा और उन्होंने ने अमीरी गरीबी के भेदभाव का नारा लगाकर इस सेवाकार्य का विरोध किया । इनका नेता था -हैदर जो एक माना हुआ गुंडा था । उसने subhash और उनके साथियों को आने के लिए मना कर दिया और विरोध किया लेकिन क्या हुआ कि थोड़े दिन बाद ही स्थिति बदल गयी और हैदर का परिवार भी हैजे के चपेट में आ गया तो मदद के लिए कोई आगे नहीं आया और अगर आये तो सुभाष और उनके साथी जो हैदर के लिए अपने विरोध को भूलकर उनके परिवार में पहुंचे और उन्हें दवाईया दी ।

हैदर अब शर्म से सिर झुकाए खड़ा था इस पर सुभाष ने हैदर से कहा ‘इस गलती के बदले तुम भी हमारे साथ आ जाओ ‘ और लोगो के लिए सेवाकार्य करो और नेक इन्सान बनो । जनता के सच्चे सेवक सुभाष चन्द्र बोस ने एक दिन भारत की आजादी के लिए युद्ध छेड़ा था और जयहिंद का नारा दिया था ।