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दूसरे लोग क्यों हमारी तुलना में अधिक सफल है – success person story in hindi

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success person story in hindi – दूसरे लोग क्यों हमारी तुलना में अधिक सफल है  :  सभी के लिए परिस्थियाँ और अवसर एक जेसे नहीं होते और नहीं आगे बढ़ने के लिए साधन भी लेकिन फिर भी इंसानी स्वाभाव में कुछ चीज़े ऐसी होती है जो उसे बाकियों से अलग करती है और यही कुछ चीज़े होती है जो किसी इन्सान को दुसरे किसी से अधिक सफल बनाता है और ये असल में कुछ जिन्दगी के अनुभवों को बारीकियों से समझने पर हमारे अंदर विकसित होती है और कुछ वो है जो हमे अपने आस पास के माहौल से या हमारी बचपन की परवरिश पर भी निर्भर करती है उन्ही में से एक है ” आत्मसम्मान ” अर्थात आप अपने लिए कितना सम्मान रखते है दुसरे शब्दों में कहें तो अपने लिए सकारात्मक नजरिया वो है जो आपके लिए चीजों को काफी बेहतर स्तर तक बदल सकता है नहीं तो आप जिन लोगो को अपनी तुलना में अधिक सफल मानते है उनके जीवन पर एक नजर डाल सकते है |

मैं एक कहानी के माध्यम से बताना चाहूँगा आपको कि जिन्दगी में ‘आत्मसम्मान ‘ और अपने लिए सकारात्मक नजरिया रखने वाले लोग क्यों दूसरों की तुलना में अधिक सफल होते है और जिन्दगी में बहुत लक्ष्य ऐसे होते है जो हम अपनी सकारात्मक सोचा के जरिये साध सकते है |

” एक भिखारी एक रेलवे स्टेशन पर एक पेंसिलों का कटोरा लिए बैठा था कि उधर से एक अधिकारी उसके पास से गुजरा उसने उसे देखा और कोई भी पेंसिल नहीं ली जबकि उसके कटोरे में उसे भिखारी समझ कर दया दिखाकर कुछ पेसे उसके कटोरे में डाल दिए  और जाकर ट्रेन में बैठ गया | ट्रेन चलने ही वाली थी की एकाएक अधिकारी उस डिब्बे में से उतरा और आकर भिखारी से कहा कि ” मैं कुछ पेंसिले भी लेना चाहूँगा क्योकि आखिर तुम भी एक व्यापारी हो और मैं भी ” और कुछ पेंसिले लेकर वह जाकर ट्रेन में बैठ गया |कुछ महीनो बाद वह अधिकारी एक function में गया तो वंहा उसने क्या देखा कि वह भिखारी भी उसी पार्टी में अच्छे कपड़ो में बाकी लोगो की ही वेशभूषा में वंहा मौजूद था | भिखारी ने अधिकारी को देखा तो उसके पास गया और उस से कहा कि ” आप शायद मुझे न पहचाने लेकिन मैं आपको जानता हूँ | ” तो उस पर उस अधिकारी ने उस भिखारी को पहचानते हुए बोला कि हाँ मुझे याद है तुम स्टेशन पर कुछ महीनों पहले भीख मांग रहे थे लेकिन तुम यंहा क्या कर रहे हो तो भिखारी ने जवाब दिया कि अपने उस दिन मुझे भीख देने की बजाय मेरे साथ बड़े सम्मान से पेश आये और मुझे एक बहुत बड़ी सीख दे गये वैसा करके आपने मुझे मेरा आत्मसम्मान लौटा दिया और आपके जाने के बाद मुझे ये अहसास हुआ कि मैं जो अब हूँ उस से कंही बेहतर कर सकता हूँ उसके बाद मेने कुछ करने की ठान ली और मेहनत के साथ काम करने लगा इसी वजह से आज मैं यंहा हूँ | आपके उस सम्मानपूर्ण बर्ताव ने मेरी जिन्दगी बदल दी है और मैं मेरा आत्मसम्मान वापिस लौटाने में आपने जो मेरी मदद की उसके लिए आपको धन्यवाद देता हूँ |

तो देखा आपने केसे अपने आत्मसम्मान की वजह से उस भिखारी ने अपनी जिन्दगी बदल लीं जबकि हम से हर कोई जब मुश्किल वक़्त आता है तो हम सोचते है लोग हमसे आगे निकल रहे है और खुद को छोटा feel करते है जबकि सब हमारे हाथ में ही होता है ,मुझे याद नहीं मैंने ये कंहा पढ़ा था कि ” जैसा हम अपने लिए सोचते है वैसे ही हमारे लिए हमारे भविष्य ने रख छोड़ा है फिर वो हम पर निर्भर करता है कि हम अपने लिए कितना अच्छा सोच पाते है | ” और  मेरी जिन्दगी का अनुभव भी इसकी पुष्टि करता है जबकि ये थोडा कठिन मालूम होता है कि कैसे हमारे लिए हमेशा एक सकारात्मक सोच रख पाना संभव हो सकता है लेकिन यकीन मानिये आप ये कर सकते है |