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सुगंध नहीं दुर्गन्ध – sugandh in hindi Story

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sugandh in hindi Story -एक बार एक राजा अपने प्रदेश के भ्रमण के लिए निकला तो वापिस लौटते समय वो ऐसे स्थान से होकर निकला जन्हा जूते बनाने वाले चर्मकार रहते थे | पुराने समय में मशीने तो होती नहीं थी इसलिए उस समय चमड़े की बदबू से उस इलाके का बुरा हाल था और वो दुर्गन्ध राजा को बहुत असहनीय लगी | राजा का सिर फटने लगा तो उसने सोचा क्यों न इस बारे में मैं कुछ करूँ |

यह सोचकर राजा ने सैनिको को बुलाया और उस इलाके की देनिक सफाई के लिए बाध्य किया और कहा की हर रोज़ इस इलाके की सफाई होनी चाहिए और सडको को अच्छे से पानी से धोया जाये और सुगन्धित इत्र युक्त जल का भी छिडकाव किया करो | जिस से यंहा रहने वाले लोग आराम से रह सके |

कुछ दिन बाद ही सभी चर्मकार इकठा हुए और राजदरबार जाने की योजना बनायीं | राजदरबार में पहुँच कर उन लोगो ने राजा से निवेदन किया कि महाराज आपके आदमी हर रोज़ सफाई करके जाते है और सफाई करने के बाद पूरा इलाका दुर्गन्ध से भर जाता है और इसी वजह से हम लोगो का जीना दूभर हो गया है | दुर्गन्ध के मारे हमारे सिर फटते है | राजा ने इस बात को बड़ी गंभीरता से लिया और उसे लगा ये सेनिको की कामचोरी का परिणाम है तो उसने सेनिको को बुलाकर पुछा कि हमारे आदेशो का पालन क्यों नहीं हुआ इस पर सैनिको ने कहा महाराज आपके आदेश की कोई अनदेखी नहीं हुआ है हमारे कर्मचारी नित्य उस जगह की सफाई करते है तो राजा को हैरानी हुई तो बात का पता लगाने के लिए उनके साथ उस जगह को देखने खुद गया |

वंहा राजा को कोई दुर्गन्ध महसूस नहीं हुई | राजा ने चर्मकारों से सवाल किया कि कन्हा है दुर्गन्ध ? तो इस पर चर्मकारों ने कहा आपको यंहा दुर्गन्ध नहीं आ रही क्या ? हमारा तो मारे परेशानी के बुरा हाल हुआ जा रहा है | यह दुर्गन्ध आपके आदमी ही यंहा रोज़ फैला कर जाते है | रजा के मंत्री को साडी कहानी समझ आ गयी उसने राजा के कान में कहा महाराज ये लोग चमड़े की दुर्गन्ध के आदी है इसलिए यह सुगंध उन्हें असहनीय लग रही है |

इसी तरह हमारे देश की भी यही मूल समस्या है | कुरीति और बुरे विचार व बुरी संगति के असर के कारण और दूषित विचारधारा से परभावित कुछ लोगो को बदलाव असहनीय लगते है और उसी से सारा असंतुलन पैदा होता है फिर चाहे वो राजनीतिक हो या धार्मिक |