Home Short Stories मेरे पुण्य ले लो – Take my virtue raja janak story in...

मेरे पुण्य ले लो – Take my virtue raja janak story in hindi

SHARE

raja janak story – राजा जनक का अब अंतिम समय आ गया था | उनको लेने के लिए खुद धर्मराज अपने साथियों के साथ आये | राजा जनक बेहद न्यायप्रिय और कर्तव्यनिष्ठ राजा थे | राजा होते हुए भी उन्होंने प्रजा की सेवा में पूरा जीवन अर्पण कर दिया और अपने तप में कोई कमी नहीं आने दी  | स्वर्ग जाते समय राजा के मार्ग में नरक भी आया जन्हा पापियों को तरह तरह की यातनाएं दी जा रही थी | उनकी चीख पुकार और प्रलाप सुनकर राजा जनक ठहर गये |

उन्होंने धर्मराज से इन यातनायों के पीछे का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि महाराज ये तो नरक है इनको यंहा इनके बुरे कर्मो की सज़ा दी जा रही है | इस पर धर्मराज से राजा ने पुछा क्या किसी भी रीति से इनको इस कष्ट से मुक्ति नहीं मिल सकती तो धर्मराज ने कहा नहीं क्योंकि इन्होने जीते जी बहुत लोगो को सताया है और बहुतों को कष्ट दिया है तो ऐसा तो नहीं हो सकता |

जनक बोले कोई तो उपाय होगा तो धर्मराज कुछ सोचते हुए बोले कि महाराज एक उपाय तो है लेकिन वो बहुत कठिन है | यदि कोई व्यक्ति अपने जप के सम्पूर्ण पुण्य इन्हें देने के लिए राज़ी हो जाये तो इन्हें इस कष्ट से मुक्ति मिल सकती है | तो जनक बोले कि ठीक है मैं अपने जीवन भर की साधना और तप से कमाए गये पुण्यो को इनके लिए देता हूँ | यह सुनकर धर्मराज अचम्भित रह गये बोले कि महाराज जो पुण्य अपने कठिन तपस्या के बल पर हासिल किये है आप अपने जीवन भर के पुण्य इनके लिए कैसे दान कर सकते है |

जनक बोले धर्मराज व्यक्ति का पहला कर्तव्य मानव की सेवा है और ये भी कहा गया है बुरो को मत मिटाओ उनके अंदर छिपी बुरे को मिटाओ | मैं वही करने जा रहा हूँ | हो सकता है मेरे ऐसा करने पर मानव की आने वाली पीढियां अच्छे कर्म करें और मानवहित और उनकी सेवा को ही सर्वोच्च समझे | धर्मराज जनक की बातों से संतुष्ट हो गये और उन्होंने सभी पापी आत्माओं को मुक्त कर दिया |