Home मेरी कवितायेँ तेरे ख्यालो में तुझसे मैंने पनाह मांगी है

तेरे ख्यालो में तुझसे मैंने पनाह मांगी है

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प्रकृति के साथ ये महकती सुबह

और तुमसे मिलती उसकी ये समरसता ,

याद दिलाती साथ के उन बीते लम्हों की

कि मन करता है फिर तय करू

मैं उम्र भर तेरे संग कोई रस्ता ,

यकीन मानो लगता ही नहीं था

साथ ये मेरा तेरा कभी ऐसे छूटेगा

खुशियो भरे पलों का ये दौर

यूँ इतनी आसानी से टूटेगा ,

याद है तुम्हे वो कोने का मंदिर

जंहा ये मोहब्बत गहराई थी

प्यार का सावन लिए तुम

तुम यूँ मेरी जिंदगी में आई थी

खैर आज फिर मैंने ,

तुम्हारे साथ के लिए दुआ मांगी है

जानता हूँ खफा है मेरा खुदा मुझसे

तभी तो तेरे ख्यालो में तुझसे

मैंने पनाह मांगी है …

कमल अग्रवाल