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इन्द्रियाँ और उनकी हड़ताल -The five senses story Hindi

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The five senses story Hindi -एक बार शरीर की सारी इन्द्रियाँ एकमत हुई और  हड़ताल कर दी | इन्द्रियाँ मानती थी कि वो अथाह मेहनत करती है लेकिन फिर भी उन्हें उनका श्रेय नहीं मिलता और उन्होंने कहा सारा दिन मेहनत हम करें और मेहनत का सारा माल ये सारा पेट हजम कर जाए वो भी अकेला ये तो हमारे लिए असहनीय है | आँख कान नाक पांव सबने अपने अपने दल बना लिए सभी का कहना था कि अब वो लोग खुद कमाई करेंगे |उस कमाई को वो खुद खायेंगे और किसी दुसरे के साथ वो इसे साझा नहीं करेंगे |

पेट ने सबको समझाया कि तुम लोग जितनी मेहनत करते हो और कमाकर मुझे खिलाते हो वो सब मैं तुम्ही को तो लौटा देता हूँ ताकि तुम लोग मजबूत बनो और इसलिए तुम अपनी हड़ताल करने का इरादा त्याग दो और इसमें भी तुम्हारा ही नुकसान है ये सही नहीं है लेकिन किसी ने भी उसकी एक नहीं सुनी |

सभी इन्द्रियों ने कहा तुम तानाशाह हो और पेट की नहीं मानते हुए उन्होंने अपनी हड़ताल शुरू रखी और काम करना बंद कर दिया | पेट को कुछ नहीं मिलने के कारण शरीर ने रक्त रस कम हो गया और इन्द्रियां भी कमजोर होने लगी | सभी अंगो की शक्तियाँ भी कम होने लगी तो अब इन्द्रियों को अपने किये पर पछतावा होने लगा और दिमाग ने उनको चेताया कि तुम्हारे काम करने के तुम्हारी मेहनत न केवल पेट भरता है बल्कि जो तुम उसके लिए करते हो वो उतना बल्कि उस से अधिक तुम्हारे पास लौट कर वापिस आता है | दूसरों की सेवा कर हम कभी घाटे में नहीं रहते बाकि ये हमेशा अच्छा होता है |

तुम अपना कर्तव्य पूरा करो और तुम्हे उसका फल अवश्य ही मिलेगा | दिमाग की बाते सुनकर इन्द्रियां काम पर लौट आई | परोपकार में ही हम सबका सह अस्तित्व और भला निहित है |