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क्या ईश्वर एक कल्पना मात्र है मुझे लगता है ऐसा है – there is no God in Hindi

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there is no God in Hindi – पूर्णतया एक नास्तिक होने के नाते मैं कहना चाहूँगा यदि आपका विश्वास है कि एक सर्वशक्तिमान, सर्वव्यापक और सर्वज्ञानी ईश्वर है, जिसने विश्व की रचना की, तो कृपा करके मुझे यह बतायें कि उसने यह रचना क्यों की? कष्टों और संतापों से पूर्ण दुनिया – असंख्य दुखों के शाश्वत अनन्त गठबन्धनों से ग्रसित! एक भी व्यक्ति तो पूरी तरह संतृष्ट नही है। कृपया यह न कहें कि यही उसका नियम है। यदि वह किसी नियम से बँधा है तो वह सर्वशक्तिमान नहीं है। वह भी हमारी ही तरह नियमों का दास है। कृपा करके यह भी न कहें कि यह उसका मनोरंजन है। नीरो ने बस एक रोम जलाया था,और उसका इतिहास में क्या स्थान है?पन्ने उसकी निन्दा के वाक्यों से काले पुते हैं, भत्र्सना करते हैं – नीरो एक हृदयहीन, निर्दयी, दुष्ट। तब किस प्रकार तुम अपने ईश्वर को न्यायोचित ठहराते हो? उस शाश्वत नीरो को, जो हर दिन, हर घण्टे ओर हर मिनट असंख्य दुख देता रहा, और अभी भी दे रहा है।फिर तुम कैसे उसके दुष्कर्मों का पक्ष लेने की सोचते हो, जो नीरो से प्रत्येक क्षण अधिक है? इसलिये मैं पूछता हूँ कि उस चेतन परम आत्मा ने इस विश्व और उसमें मनुष्यों की रचना क्यों की? मनोरंजन के लिये? तब उसमें और नीरो में क्या फर्क है?

 

Source :मुझे सही से याद नहीं है लेकिन मुझे लगता है भगत सिंह के लेखन के किसी अंश से प्रेरित है |