Home मेरी कवितायेँ थोड़ा तो वक़्त लगता है…!

थोड़ा तो वक़्त लगता है…!

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“..चार साल होने को है उस लम्हे को जब मेने उसे प्रपोज़ किया लेकिन तब सब कुछ कह देने से पहले की गहमा गहमी आज भी जेहन में ताजा है मन की कहने से पहले जो कुछ मन में चल रहा था उसे मेने शब्दों में कुछ यूँ लिखा है :-
आज एक अलग सी शाम है
दो दिल साथ चल रहे है ,
मुश्किल है कुछ कह पाना
पर मेरे मन की आरजू
शब्द बन निकलने को बेताब है ,
दोनों मन मीठी उलझन से भरे
पहल कौन करे ये सवाल है ,
मैं खुद से कहने लगा अब तक
मेरी बात रही मेरे मन में
कह भी न सका इस उलझन में ,
सामने खड़ी है वो मेरे
तो अब क्यों ये हाल है ,
वो कहने लगी तुम ना
जाहिल हो इस मामले में
प्यार था तो कह दिया होता
क्यों हाल बेहाल है ,
मैंने कहा यूँ तो
मुझको भी तुम मे
खुद का अक्स लगता है,
पर मन की बात कहने में
थोड़ा तो वक़्त लगता है…!”

कमल अग्रवाल