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Vinoba bhave in hindi – विनोबा भावे का बचपन

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विनोबा भावे
जन्मतिथि: 11 सितेम्बर, 1895
निधन: 15 नवंबर, 1982
विनोबा भावे
जन्मस्थान: गागोडे, महाराष्ट्र
Vinoba bhave in hindi
Vinoba bhave in hindi

 

Vinoba bhave in hindi बालक विनोबा बचपन में बड़े दुबले पतले थे || साधारण कपडे पहनते और बहुत ही सादा जीवन बिताते | लेकिन स्वाभाव से बड़े ही तेज और निडर होने के कारण किसी कि भी उनके सामने बोलने कि मजाल नहीं होती थी | विनोबा को अपनी उम्र से बड़े लडको से भी कोई डर नहीं लगता था |

बड़ी ही गर्मजोशी से सबसे साथ मिलते और खेलते | सच्चाई और देशभक्ति की भावना उनके मन में बड़ी कूट कूट कर भरी हुई थी |

वह अपने साथियों से कहा करते कि हम भारतवासी है इसलिए किसी भी भारतवासी की तरह रहेंगे और किसी से भी डरने की कोई आवश्यकता नहीं है अपने देश में |

स्कूल में अंग्रेजी की भी पढाई होती थी और स्कूल का प्रशाशन चाहता था कि बच्चे अंग्रेजी में पढ़े और अंग्रेजी में ही बात करें | ऐसे में कुछ बच्चे ऐसे भी तो उनके कहे अंग्रेजी में बात करते तो विनोबा (Vinoba bhave in hindi ) को बहुत गुस्सा आता खासकर जब वो गलत अंग्रेजी में बात करते तो विनोभा दो टूक कह दिया करते थे कि तुम कौनसा अंग्रेज के बेटे हो इसलिए अपनी मात्रभाषा में मराठी में ही क्यों बात नहीं किया करते |

वो हाजिरजवाब भी थे और एक बार उनके नाखून नहीं कटे होने कि वजह से साथ वाले मित्रो ने चुटकी ली कि क्या बात है विनोबा तुम्हारे नाखून क्यों नहीं कटे है इस पर विनोबा ने सहज भाव से उत्तर दिया ” तुम्हे क्यों चिंता हो रही है तुम नाई हो क्या ” सुनकर सब लड़के हंस पड़े और वो बालक जिसने सवाल किया था बहुत लज्ज्ति हुआ |

वो जितने पढाई में तेज थे उतने ही अन्य कार्यो में भी थे गणित में तो खासतौर पर वो अपनी क्लास में सबसे आगे रहते | उसी तरह वो देशभक्ति में भी खूब आगे थे एक दिन उनके गाँव में उनके किसी मित्र के यंहा खेत में एक अंग्रेज अफसर आया जिसने विनोबा के मित्र के यंहा खेत में अपना तम्बू गाडा और अपने काम पर चला गया |

विनोबा को जब मालूम हुआ तो अपने सब मित्रो को लेकर वो अपने मित्र के यंहा पहुंचे और अपने मित्र से कहा जिन लोगो ने हम गुलाम बना रखा है तुमने उसी को अपने यंहा ठहरा रखा है | इस पर उनके मित्र ने कहा मुझे तो कुछ मालूम नहीं इस पर वो अपने मित्रो के साथ उस खेत में पहुंचे और उस अंग्रेज का तम्बू बातों ही बातों में उखड कर फेंक दिया और वो अंग्रेज अधिकारी उन साहसी बालकों का विरोध भी नहीं कर पाया |

इस प्रकार ये साहसी बालक ही आगे चलकर महान संत विनोबा भावे के नाम से प्रसिद्द हुए | गाँधी जी के संस्कारो और आदर्शो और उनके भूदान यज्ञ के के कारण उन्हें हमेशा याद रखा जायेगा |