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धैर्य और बुद्धि – Patience story in hindi

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Patience story in hindi – धैर्य और बुद्धि – एक दिन किसी शहर में एक गरीब ब्राह्मण रहता था एक दिन वो भिक्षा मांगने एक धनी व्यापारी के यंहा गया तो देखता है व्यापारी बहुत खुश है तो ब्राह्मण व्यापारी से पूछता है कि आज आप इतने खुश क्यों है इस पर व्यापारी ने बोला कि आज भगवन की कृपा से मुझे पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई है इसलिए मैं बेहद खुश हूँ और उसने ब्राह्मण को सोने की एक मोहर दी | जिसे पाकर ब्राह्मण दुआएं देता हूँ वंहा से घर चला गया |

बाकि के घरों से उसे बहुत सारा आटा और खाद्य सामग्री मिली लेकिन सोने की मोहर मिलने की ख़ुशी में उसे घर लौटने में देरी हो गयी | जब वह लौट रहा था तो सुरक्षा की दृष्टि से उसने सोने की वो मोहर अपने आटे में छुपा ली थी | वही हुआ जिसका डर था अँधेरे का फायदा उठाकर उसे डाकुओ में घेर लिया और उस से कहा कि जो कुछ है हमे सौंप दे वर्ना तुझे जान से हाथ धोना पड़ेगा |

इस पर ब्राह्मण बेहद डर गया लेकिन उसने धैर्य नहीं खोया और डाकुओं के सरदार से कहा इस आटे में एक सोने की मोहर है तुम वो ले जाओ पर ये आटा मुझे दे जाओ और मुझे जाने दो तो सरदार ने पूछा इस आटे में ऐसा क्या है जो तुम मुझे आटे की बजाय सोने की मोहर देने को तेयार हो तो इस पर उसने कहा कि ये आटा चमत्कारी है और रोज सोने की मोहर पैदा करता है |

सरदार ने सोचा कि इस से ये आटा ही ले लिया जाये और सोने की मोहर वंही फेंक दी और आटा लेकर भाग गया | ब्राह्मण को यकीन हो गया कि संकट में धैर्य नहीं खोने पर सफलता भी मिल ही जाती है वो अधिक दूर नहीं होती |