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सुई की खोज – a women story

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women story – किसी गाँव में एक बुढिया थी | अकेली रहती थी एक दिन वो रात के अँधेरे में काफी देर से झोपडी के बाहर कुछ खोज रही थी तो वंहा से गुजरने वाले किसी आदमी ने पुछा अम्मा ‘रात के अँधेरे में यंहा क्या खोज रही हो ” तो बुढिया ने उस कहा कि बेटा मेरी सुई खो गयी है वो ढूंढ रही हूँ इस पर वो आदमी भी उस बुढिया के साथ सुई खोजने में लग गया | ऐसे उन्हें खोजते हुए देखकर पूरा गाँव जो है वो बुढिया की सहायता के लिए आ गया |

बहुत देर की खोजबीन के बाद जब किसी को कुछ नहीं मिला तो बुढिया से किसी ने पुछा कि अम्मा क्या आपको अंदाज़े ये याद नहीं सुई कन्हा गिरी थी तो बुढिया ने कहा हाँ बेटा मुझे याद है सुई कन्हा गिरी थी | तो लोगो ने पुछा कि बताओ कंहा गिरी थी इस पर बुढिया कहने लगी कि बेटा सुई तो मेरी झोपड़ी के अंदर गिरी थी |

तो सारे लोग जो उसकी मदद के लिए आगे आये तो क्रोधित होकर कहने लगी तो बाहर क्यों ढूढ़ रही हो जब सुई अंदर गिरी है तो इस पर बुढिया ने उन लोगो से कहा क्योंकि बेटा झोपडी में तो घुप्प अँधेरा था जबकि बाहर चाँद की रौशनी है इसलिए बाहर देख रही थी क्योंकि अंदर तो कुछ दिखाई ही नहीं दे रहा था |

लोगो ने अपना माथा पीट लिया |

moral :हम अक्सर उन चीजों के लिए परवाह करते है जिनकी जरुरत ही नहीं होती और इसी वजह से इस बुढिया की तरह लक्ष्य से भटक जाते है |